भारतीय कार्यस्थलों पर कर्मचारियों की काम के प्रति घटती दिलचस्पी अक्सर चर्चा का विषय बनती है। लेकिन जिन लोगों से कर्मचारियों को अपने काम से जोड़े रखने की उम्मीद की जाती है, यानी मैनेजरों की, शायद उतनी चिंता नहीं की जा रही। एक अध्ययन ने इसी समस्या की ओर ध्यान दिलाया है। कार्यस्थलों पर इन दिनों एक असामान्य बदलाव देखने को मिल रहा है। मैनेजर अब अपने काम से उतने जुड़े हुए नहीं रह गए हैं, जितने पहले हुआ करते थे।
वैश्विक कार्यस्थलों की स्थिति पर गैलप (Gallup) की 2026 की रिपोर्ट के अनुसार, दुनिया भर में अपने काम के प्रति मैनेजरों के जुड़ाव का स्तर 2022 के 31 प्रतिशत से घटकर 2025 में 22 प्रतिशत रह गया। तुलना करें तो मैनेजरों के अलावा अन्य कर्मचारियों में यह आंकड़ा 19 प्रतिशत था।
गैलप के दक्षिण एशिया संबंधी आंकड़ों में भारत की सबसे बड़ी हिस्सेदारी है। अध्ययन के अनुसार, 2025 में इस क्षेत्र में मैनेजरों के काम के प्रति जुड़ाव में आठ प्रतिशत अंकों की गिरावट दर्ज की गई। यह दुनिया के किसी भी क्षेत्र में दर्ज की गई सबसे बड़ी गिरावट थी।
भारतीय कंपनियों के लिए यह चिंता की बात होनी चाहिए, क्योंकि किसी भी संगठन में मैनेजरों की स्थिति शायद सबसे कठिन होती है। एक ओर वरिष्ठ अधिकारियों के दिए लक्ष्य होते हैं, तो दूसरी ओर अपनी टीम का विरोध या असहमति। उन्हें उत्पादकता बढ़ानी है, अच्छे कर्मचारियों को कंपनी में बनाए रखना है, हाइब्रिड टीमों का काम सुचारु रूप से चलाना है, नियमित रूप से काम का मूल्यांकन करना है और आपसी विवाद भी सुलझाने हैं। इसके साथ ही कामकाज में एआई को अपनाने की जिम्मेदारी भी उन्हीं पर है। और इन सबके बीच कर्मचारियों का मनोबल भी बनाए रखना है।
संभव है कि इतनी सारी जिम्मेदारियां निभाने के लिए अब पहले से कम मैनेजर बचे हों।
अध्ययन में पाया गया है कि दक्षिण एशिया में मैनेजरों के अपने काम से जुड़ाव के साथ-साथ कुल कर्मचारियों में मैनेजरों की हिस्सेदारी भी घटी है। रिपोर्ट के अनुसार, इसका एक संभावित कारण भारत के प्रौद्योगिकी क्षेत्र में मध्य और वरिष्ठ स्तर के पदों में आई कमी हो सकती है। इससे संकेत मिलता है कि संगठन प्रबंधन के पद घटा रहे हैं।
ऊपरी तौर पर यह कंपनियों के अधिक कार्यकुशल होने का संकेत लग सकता है। लेकिन थोड़ा गहराई से देखें तो पता चलता है कि मैनेजरों की संख्या भले ही घट गई हो, प्रबंधन से जुड़े काम कम नहीं हुए हैं। नतीजा? बचे हुए मैनेजरों को पहले से अधिक जिम्मेदारियां उठानी पड़ रही हैं और बड़ी टीमों को संभालना पड़ रहा है।
अमेरिका में मैनेजरों पर हुए शोध से भी पता चलता है कि टीम का आकार और जिम्मेदारियां बढ़ने से काम के प्रति उनका जुड़ाव घटने लगता है। हालांकि, प्रबंधन की बेहतर क्षमता और उचित प्रशिक्षण इस असर को कम कर सकते हैं। लेकिन शोध यह भी बताता है कि लोगों को प्रभावी ढंग से संभालना एक विशेष कौशल है, जिसके लिए कई मैनेजरों को कभी जरूरी प्रशिक्षण ही नहीं मिला।
कंपनियां मैनेजरों से यह उम्मीद नहीं कर सकतीं कि वे अपनी टीमों को एकजुट और प्रेरित रखें, जबकि उनके अपने काम में लगातार नई जिम्मेदारियां, अधिक कर्मचारी और बढ़ता दबाव जुड़ता जाए, लेकिन इन्हें संभालने के लिए जरूरी सहयोग न मिले।
जब मैनेजर खुद काम के बोझ से दबे हों और अपनी जिम्मेदारियां निभाने के लिए संघर्ष कर रहे हों, तो यह समस्या सिर्फ मैनेजरों की नहीं रह जाती। यह पूरे संगठन की समस्या बन जाती है।

