कंपनी कहती कुछ है, मतलब कुछ और होता है। और इन सबके बीच आपकी तनख्वाह वहीं की वहीं रहती है।
CTC (संज्ञा): एक ऐसी बड़ी रकम, जिसे देखकर नौकरी के उम्मीदवार खुश हो जाते हैं और उनके माता-पिता भी हैरान रह जाते हैं। लेकिन इसका असर बैंक खाते में नज़र नहीं आता। इसे असली कमाई समझने की भूल न करें।
Variable Pay (संज्ञा): आपकी तनख्वाह का वह हिस्सा जो कंपनी के प्रदर्शन, आपके प्रदर्शन, बाज़ार के हालात और CFO के मूड के हिसाब से ऊपर-नीचे होता रहता है। ज़रूरी नहीं कि इसी क्रम में हो।
Hybrid Working (संज्ञा): काम करने की एक शानदार व्यवस्था, जिसमें मैनेजर ऑफिस आए तो आप घर से काम करते हैं और मैनेजर घर से काम करे तो आपको ऑफिस आना पड़ता है।
Skip-Level Meeting (संज्ञा): अपने बॉस के बॉस के साथ एक गोपनीय बैठक। जिसके तुरंत बाद आपका बॉस आपसे असाधारण रूप से विस्तार में बातचीत करता है।
Town Hall (संज्ञा): एक लोकतांत्रिक बैठक, जिसमें कर्मचारियों को कोई भी सवाल पूछने की पूरी आज़ादी होती है। बस सवाल Corporate Communications से मंज़ूर होना चाहिए और उसका तनख्वाह से कोई लेना-देना नहीं होना चाहिए।
Cost Optimisation (संज्ञा): वाइस-प्रेसिडेंट की अगुवाई में चलने वाली एक गंभीर कवायद। इसके बाद कंपनी इस नतीजे पर पहुँचती है कि तीन जूनियर कर्मचारियों का खर्च एक सीनियर वाइस-प्रेसिडेंट से भी ज़्यादा है।
Market Correction (संज्ञा): जब आपकी जगह रखे गए नए कर्मचारी को आपसे 40 प्रतिशत ज़्यादा तनख्वाह दी जाती है। इसे बाज़ार के उन हालात से न जोड़ें, जिनकी वजह से आपकी तनख्वाह सिर्फ 4 प्रतिशत बढ़ पाई थी।

