कंप्यूटर ने प्रोग्रामर बनाए, सोशल मीडिया ने इन्फ्लुएंसर। AI क्या बनाएगा?

Microsoft के एग्ज़िट ऑफर ने नौकरीपेशा लोगों के मन में छिपा एक डर फिर जगा दिया है। क्या आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) अब सचमुच नौकरियाँ निगलने वाला है? Microsoft ने इसे छँटनी नहीं, बल्कि अपनी मर्ज़ी से कंपनी छोड़ने का प्रस्ताव बताया है। कंपनी ने यह भी नहीं कहा कि वह कर्मचारियों की जगह AI को लाने जा रही है। फिर भी सवाल बना हुआ है। इसका जवाब तलाशने के लिए ज़रा अतीत में झाँकते हैं और फिर भविष्य की ओर चलते हैं।

पर्सनल कंप्यूटर आया तो कंप्यूटर और सॉफ्टवेयर से जुड़े नए पेशे बने। डेस्कटॉप पब्लिशिंग जैसे काम शुरू हुए। इंटरनेट ने ऑनलाइन कारोबार करने वालों, वेबसाइट बनाने वालों, ग्राफिक डिज़ाइनरों और डिजिटल सेवाएँ देने वालों के लिए नए रास्ते खोले। फिर सोशल मीडिया आया और कंटेंट बनाकर पैसे कमाने का एक बिल्कुल नया ज़रिया पैदा हो गया।

इसी तरह AI भी नए पेशों और यहाँ तक कि नए उद्योगों को जन्म दे सकता है। कार्यलोक ज़रा हल्के-फुल्के अंदाज़ में भविष्य में झाँककर देख रहा है कि अगर AI की वजह से आज के पेशेवरों की नौकरी चली जाए, तो वे आगे क्या-क्या कर सकते हैं।

सॉफ्टवेयर इंजीनियर: वे अकेले ही अपनी सॉफ्टवेयर कंपनी चला सकते हैं। खास ज़रूरतों के लिए सॉफ्टवेयर बनाकर बेच सकते हैं।

कोडर: वे ऐसे समझदार AI एजेंट बना सकते हैं, जो किसी कारोबार के कई काम अपने आप सँभाल लें।

AI पेशेवर: वे अस्पतालों, कारखानों, स्कूलों और दूसरे संस्थानों की ज़रूरतों के हिसाब से AI सेवाएँ तैयार कर सकते हैं।

डेटा एनालिस्ट: वे अपना कारोबार शुरू करके खेती की उपज के बाज़ार, प्रॉपर्टी की कीमतों या ग्राहकों की पसंद से जुड़ी ताज़ा जानकारी और विश्लेषण बेच सकते हैं।

लेखक: AI की मदद से वे ऐसी कहानियाँ रच सकते हैं, जिनमें पाठक खुद हिस्सा लें और कहानी के किरदार उनके सवालों का जवाब दें। वे अलग-अलग लोगों की ज़रूरत के हिसाब से पढ़ाई की किताबें, डॉक्यूमेंट्री और गेम भी बना सकते हैं।

कस्टमर सर्विस कर्मचारी: वे उसी AI की मदद से अपनी कस्टमर सपोर्ट सेवा शुरू कर सकते हैं, जो दुनिया भर की कंपनियों के ग्राहकों को अलग-अलग भाषाओं में मदद दे।

अनुवादक: वे सिर्फ अनुवाद करने के बजाय अलग-अलग भारतीय भाषाओं में पूरी डिजिटल सेवाएँ तैयार करने में कंपनियों की मदद कर सकते हैं, ताकि हर क्षेत्र के लोग उन्हें अपनी भाषा में आसानी से इस्तेमाल कर सकें।

बहीखाता रखने वाले: वे छोटे दुकानदारों और व्यापारियों के लिए कम खर्च वाले, आसान ऐप बना सकते हैं, जिनसे कारोबार का हिसाब-किताब और दूसरे काम सँभाले जा सकें। इसके लिए उन्हें प्रोग्रामर की भी ज़रूरत नहीं पड़ेगी।

पारिवारिक इतिहास तैयार करने वाले: वे पुरानी पारिवारिक तस्वीरों, चिट्ठियों और यादों को जोड़कर परिवार की ऐसी डिजिटल कहानी बना सकते हैं, जिसे लोग देख सकें, पढ़ सकें और उससे जुड़ सकें। इस सेवा के बदले वे पैसे ले सकते हैं।

डिजिटल अनुभव बनाने वाले: वे लोगों की पसंद के हिसाब से वर्चुअल म्यूज़ियम, मनोरंजन के साथ जानकारी देने वाला कंटेंट और घर बैठे अलग-अलग जगहों की सैर कराने वाले डिजिटल अनुभव तैयार कर सकते हैं।

निजी ज़रूरतों के हिसाब से पढ़ाई तैयार करने वाले: वे बच्चों, नौकरीपेशा लोगों और बुज़ुर्गों के लिए उनकी ज़रूरत और सीखने की रफ़्तार के मुताबिक कोर्स बना सकते हैं।

वर्चुअल बिज़नेस बनाने वाले: वे AI टूल्स की मदद से किसी व्यक्ति के कारोबारी विचार को एक चलते-फिरते बिज़नेस में बदलने में मदद कर सकते हैं।

आज जो लोग अपनी मेहनत और हुनर के बदले तनख्वाह पाते हैं, वे AI की मदद से इससे भी बड़ा काम कर सकते हैं। वे खुद ऐसे प्रोडक्ट, सेवाएँ और कारोबार खड़े कर सकते हैं, जिन्हें चलाने के लिए आज पूरी-की-पूरी कंपनियों की ज़रूरत पड़ती है।

हो सकता है कि भारत का अगला बड़ा उद्यमी कोई ऐसा व्यक्ति हो, जिसकी पुरानी नौकरी खत्म हो गई हो। और फिर उसने AI की मदद से अपने लिए उससे भी बेहतर नया काम खड़ा कर लिया हो।