वर्षों से भारत में रोजगार सृजन की चर्चा में मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर का जिक्र अक्सर हाशिये पर ही होता रहा है। किसी को ठीक-ठीक पता नहीं था कि इस क्षेत्र में सुधार के संकेत आखिर कब दिखाई देंगे। जहां तक इसके लगातार आगे बढ़ने का सवाल था, वह धीरे-धीरे एक सपने जैसा लगने लगा था। लेकिन ताजा सरकारी आंकड़े कम-से-कम इतनी उम्मीद जरूर जगाते हैं कि शायद यह सपना अब उतना दूर नहीं है।
2024-25 में भारत के पंजीकृत फैक्टरी सेक्टर में कार्यरत लोगों की संख्या पिछले वर्ष के 1.96 करोड़ से बढ़कर 2.10 करोड़ हो गई। यानी केवल एक साल में ‘पर्सन्स एंगेज्ड’ की संख्या करीब 14 लाख बढ़ी—7.19 प्रतिशत की वृद्धि।
इसे सही परिप्रेक्ष्य में देखने के लिए थोड़ा पीछे जाना जरूरी है। 1990-91 में फैक्टरी सेक्टर में कार्यरत लोगों की कुल संख्या 82.8 लाख थी। 1995-96 तक यह बढ़कर 1.02 करोड़ हो गई। लेकिन 2001-02 तक यह आंकड़ा गिरकर 77.5 लाख रह गया—1995-96 के स्तर से करीब 24 प्रतिशत कम। हालांकि 1998-99 से वार्षिक उद्योग सर्वेक्षण (ASI) के दायरे में बदलाव हुआ था, इसलिए इन दोनों आंकड़ों की सीधी तुलना नहीं की जा सकती। 2004-05 तक यह संख्या फिर बढ़कर 84.5 लाख हो गई।
लेकिन 2011-12 तक फैक्टरी सेक्टर न केवल इस गिरावट से उबर चुका था, बल्कि 1995-96 के उच्च स्तर को पार करते हुए 1.34 करोड़ तक पहुंच गया था। 2013-14 तक ASI के अनुसार इस क्षेत्र में 1,35,38,114 लोग कार्यरत थे।
इसके बाद व्यापक रुझान ऊपर की ओर रहा। महामारी ने इसकी रफ्तार जरूर धीमी की, लेकिन ज्यादा समय के लिए नहीं। इस क्षेत्र में रोजगार 2013-14 के 1.35 करोड़ से बढ़कर 2018-19 में करीब 1.63 करोड़, 2021-22 में 1.72 करोड़, 2022-23 में 1.85 करोड़, 2023-24 में 1.96 करोड़ और 2024-25 में 2.10 करोड़ हो गया। यानी भारत की पंजीकृत फैक्टरियों में अब 2013-14 की तुलना में करीब 75 लाख अधिक लोग कार्यरत हैं—लगभग 55 प्रतिशत की स्पष्ट वृद्धि।
और यह बढ़त केवल रोजगार तक सीमित नहीं है। 2024-25 में फैक्टरियों की संख्या बढ़कर 2.67 लाख हो गई। औद्योगिक उत्पादन में 7.81 प्रतिशत, सकल मूल्य वर्धन में 9.59 प्रतिशत और स्थिर पूंजी में 10.54 प्रतिशत की वृद्धि हुई।
प्रमुख मैन्युफैक्चरिंग उद्योगों में 2024-25 में सबसे ज्यादा रोजगार खाद्य उत्पाद, टेक्सटाइल, बेसिक मेटल, मोटर वाहन और परिधान उद्योगों ने दिया—इसी क्रम में। वहीं फैक्टरी सेक्टर के कुल रोजगार का 56 प्रतिशत तमिलनाडु, महाराष्ट्र, गुजरात, उत्तर प्रदेश और हरियाणा से आया।
हालांकि ASI मुख्य रूप से भारत के पंजीकृत फैक्टरी सेक्टर को कवर करता है और उसका ‘पर्सन्स एंगेज्ड’ का पैमाना केवल श्रमिकों से व्यापक है, फिर भी 11 वर्षों में 1.35 करोड़ से 2.10 करोड़ तक की वृद्धि को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
लेकिन क्या भारत फैक्टरी रोजगार में एक दशक से जारी इस वृद्धि को बरकरार रख पाएगा और बड़े पैमाने पर रोजगार पैदा करने वाले औद्योगिक विकास के अपने सपने को हकीकत में बदल पाएगा? इसका जवाब केवल समय ही देगा।

